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लापरवाही की हद: जिले में कोरोना के एक्टिव केस 1600 के पार पहुंचने के बाद जिला प्रशासन ने लिया कंटेनमेंट जोन बनाने का फैसला

जिले में कोरोना के एक्टिव केसों संख्या डेढ़ हजार के पार
दमोह जिले में कोरोना की रफ्तार काफी तेजी से बढ़ रही है. मंगलवार तक जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1677 है वहीं अब तक 104 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है वहीं 300 मरीज कोरोना से ठीक भी हुए। 

दमोह – कोरोना पूरे देश में कोहराम मचा रहा है जिसका असर दमोह जिले पर भी पड़ रहा हैं। प्रशासन की अनदेखी और मिस मैनेजमेंट की वजह से जिले के हालत दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। जिले में लगातार बढ़ते संक्रमितों की संख्या से यहां के लोग चिंतित हैं। सतर्कता बरतने को लेकर जिला प्रशासन पर सख्ती बरतने और सड़कों-दुकानों को सैनिटाइज करने की व्यवस्था पर सवाल भी खड़ा कर रहे हैं। शहर वासियों का कहना है कि जिला प्रशासन पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कम सख्ती दिखा रहा है। नगर पालिका और जिला प्रशासन भी आसपास के इलाकों में सैनिटाइज करने का काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में कोविड-19 के संक्रमण की रफ्तार को रोकना मुश्किल होगा। जिला स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पर भी लोगों सवाल उठा रहे हैं। जिला में अब तक कोविड-19 के मरीजों के लिए मुकम्मल स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं की गई हैं।

कलेक्टर और सीएमएचओ को नही है लोगों की परवाह

सोमवार तक जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या डेढ़ हजार का आंकड़ा को पार कर चुकी है और जिला प्रशासन ने मंगलवार तक एक भी कंटेंनमेंट जोन नहीं बनाया है। ऐसा लग रहा मानो कोरोना को लेकर जिला प्रशासन सिर्फ अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा है उसे ना लोगों के स्वास्थ्य की चिंता है और ना ही कोरोना की गाइड लाइन की परवाह है। बीते एक साल में एक भी बार जिला कलेक्टर तरुण राठी या सीएमएचओ संगीता त्रिवेदी ने कोरोना को लेकर प्रेस को संबोधित करना जरुरी नहीं समझा है और ना ही किसी से कोई सलाह ली जबकि पीएम और सीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समाज सेवियों और एनजीओ चलाने वाले लोगों के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दे चुके हैं। सरकार के मानना है कि इस महामारी से वगैर आम लोगों के सहयोग से नहीं निपटा जा सकता लेकिन दमोह जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही हैं।

संक्रमित मरीज के संपर्क वालों की ट्रेसिंग बंद

यह कहना गलत नहीं होगा कि जिले में संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की खोज (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) का काम एक तरह से बंद ही कर दिया गया है। पहले किसी व्यक्ति के संक्रमित होने पर उसके संपर्क में आए लोगों पर निगरानी रखी जाती और उनकी कोरोना जांच भी की जाती थी अगर संपर्क में आए लोग जांच नहीं करवाते थे तो उस इलाके के प्रभारी अफसर उसे फोन करते थे। अब इसकी किसी को पहवाह नहीं है। संपर्क में आए अन्य लोगों को छोड़िए परिवार के सदस्यों तक की जांच नहीं करवाई जा रही है। लोग डरे हुए हैं इसलिए खुद जांच करवा रहे हैं।

हैल्थ बुलेटिन में दी जा रही अधूरी जानकारी

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पूरा जोर सूचनाओं को कम बताने पर है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जांच के बारे में स्पष्ट जानकारी न देना है। जिला प्रशासन द्वारा रोजाना शाम को जारी किए जाने वाले हैल्थ बुलेटिन में भी जिला प्रशासन आंकड़ों की बाजीगरी कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा कोरोना के संबंध में मीडिया को दी जा रही जानकारी मध्यप्रदेश के बाकी 50 जिलों से अलग है। मध्यप्रदेश के बाकी जिलों की बात करें तो कोविड के संबंध में मीडिया को सारी जानकारी मुहैया की जाती है जिससे की लोगों को सही जानकारी मिले जिसमें एक दिन में लिए गए कुल सैंपल की संख्या, पॉजिटिव और नेगेटिव मरीजों की संख्या, कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीज, जिला अस्पताल में भर्ती मरीज, होम क्वारंटीन मरीजों की संख्या, दूसरे जिले के लोगों के लिए गए सैंपल की संख्या, और स्वस्थ्य हुए कोरोना मरीजों की संख्या सहित अन्य सम्पूर्ण जानकारी दी जाती है। लेकिन दमोह जिला प्रशासन द्वारा अब तक दी गई जानकारी में, जानकारी का आधे से अधिक हिस्सा गायब रहता है. जिला प्रशासन की यही लापरवाही आम लोगों पर भारी पड़ रही है।

सरकारी निर्देशों की उड़ रहीं धज्जियां

देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था में लगी हुई हैं तो वहीं जिला प्रशासन लापरवाही की सारी हदें पार कर रहा है। सरकार के निर्देश के अनुसार कोरोना कर्फ्यू से लेकर संक्रमित इलाकों को कंटेनमेंट जोन बनाना और उस एरिया में सैनिटाइजर का छिड़काव कराना भी उचित नही समझा जा रहा है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओ का आभाव है। शासन के निर्देश का पालन भी जिले में नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कोरोना संक्रमितों की संख्या का नया रिकॉर्ड बन रहा है। दमोह जिले में रोजोना 100 से 200 के बीच कोरोना मरीज संक्रमित निकल रहे हैं।

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