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हाई प्रोफाइल धर्मांतरण मामला : आरोपियों के बचाव में प्रशासन, हिंदू संगठन का आरोप

हिन्दू जागरण मंच के सैकड़ों सदस्यों ने आज गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम दमोह कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा जिसमे उन्होंने धर्मांतरण के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर प्रश्न उठाए साथ ही जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला फूंका। इसके अलावा ईसाई मिशनरियों को संरक्षण देने और हिंदू संगठन के लोगों पर झूठी कार्रवाई करने के आरोप भी लगाए

दमोह : इन दिनों दमोह सहित पूरे प्रदेश में धर्मांतरण का मुद्दा गरमाया हुआ है। जिसको लेकर हिन्दु जागरण मंच के द्वारा मप्र के गृहमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया जिसमें बताया कि कई दिनों से दमोह जिले में मिशनरी भू माफिया और भू जिहादियों के खिलाफ हिन्दू जागरण मंच के लोग अतिक्रमण हटाने ज्ञापन दे रहे हैं, अतिक्रमण के संबंध में एक ज्ञापन 23 अगस्त 2022, दूसरा 08 नवंबर 2022 को और इससे पहले भी अन्य आवेदन हिन्दू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के द्वारा ज्ञापन सौपे गए लेकिन वर्तमान में उन अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन चुप्पी सादे हुए हैं, और न जाने किस दवाब में कार्यवाही करने से डर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तो प्रशासन द्वारा हिंदू संगठन के लोगों पर झूठे मामलों में जिलाबदर की कार्रवाई की जा रही है।

संगठन के लोगों का आरोप है कि प्रशासन शहर में बढ़ रहे अपराध पर लगाम लगाने में असफल है, गंभीर अपराध करने वाले लोगों पर कार्रवाई करने कोई कदम नहीं उठाए जा रहे बल्कि भू माफिया, धर्मांतरण और मानव तस्करी करने वालों के इशारे पर हिन्दू संगठन के सदस्यों पर जिला बदर जैसी कार्यवाही करता करता दिखाई दे रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि धर्मांतरण, मानव तस्करी, बाल अपराध के मामले में न्यायालय से जमानत रद्द होने के बाद भी अजय लाल और अन्य 9 लोगो को गिरफ्तार तक नही किया जा रहा, दमोह के मड़ाहार में दलितों का धर्मांतरण करने वाले केरल से आये ईसाई मिशनरियों के विरुद्ध शिकायत के बाद भी केस दर्ज नही किया जा रहा, उल्टा हिन्दू संगठन और उसके सदस्यों पर दवाब बनाने के उद्देश्य से अनैतिक कार्यवाही की जा रही हैं।
संगठन के लोगों के प्रशासन को चेताया है कि अगर ईसाई मिशनरियों के लोगों पर उचित कार्रवाई नहीं गई और हिंदू संगठन के लोगों पर अनुचित कार्रवाई की गई तो आने वाले दिनों में दमोह बंद और आत्मदाह करेंगे।

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धर्मांतरण और मानव तस्करी के मिले साक्ष्य : बीते दिनों राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो दमोह पहुंचे और कुछ बाल भवन/ बाल सुधार गृह का औचक निरीक्षण किया जहां उन्हें दिव्यांग बच्चों के लिए ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित हो रहे छात्रावास में बच्चों को संस्था द्वारा क्रिश्चियन धार्मिक की शिक्षा देने और ईसाई धर्म का नाम दिए जाने के सबूत मिले थे। जिसके संबंध में वह दमोह देहात थाना पहुंचकर ईसाई मिशनरियों के 10 प्रमुख लोगों पर मानव तस्करी, धार्मिक स्वतंत्रता, बाल अपराध जैसी अनेक गैर जमानती धाराओं में FIR दर्ज कराई है। इस दौरान उन्होंने दमोह प्रशासन द्वारा सहयोग न मिलने की बात कही और बताया कि भ्रमण के दौरान कि उन्हें और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ईसाई मिशनरियों ने अपने कैंपस में घुसने नही दिया, गेट बंद कर लिया था। जिस कारण राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने नगर पुलिस अधीक्षक से शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध FIR दर्ज करने के आदेश दिए बावजूद आज तक FIR दर्ज नहीं की गई।

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अचानक चौकी पहुंची दंपत्ति ने लगाए आरोप : इस बीच जब प्रियांक कानूनगो FIR दर्ज कराने चौकी गए थे उसी बीच अचानक से एक दंपत्ति पुलिस के पास पहुंचते है जो एक अन्य संस्था पर धर्मांतरण करने का आरोप लगाते हैं। (यह संस्था ईसाई मिशनरियों से विपरीत बताई जा रही हैं ) जिनके आवेदन पर लगातार पूंछतांछ हो रही है और मामला सुर्खियों में है। इस मामले में आवेदक दंपति राजेश अहिरवाल और अन्य के आवेदन में जो आरोपी है उनका पक्ष रखने नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे जेजे पीटर, जैकब बी, एमबी बर्गिस ने हमें बताया कि आवेदक दंपत्ति राजेश अहिरवाल और अन्य बीते एक वर्ष से लाल परिवार के लोगों के संपर्क में है। इस मामले में डिसाईपल्स ऑफ क्राईस्ट चर्च दमोह के पास्टर पी.व्ही. पॉल का कहना है कि दंपत्ति महिला बकायदा उनके चर्च आती थी और उसमे शामिल होने आवेदन भी किया हुआ है। फिलहाल उसके आवेदन को अभी स्वीकृति नहीं दी है।

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न्यायालय ने माना जिले के अधिकारियों से हुई लापरवाही : दूसरी ओर न्यायालय आयुक्त नि:शक्तजन मध्यप्रदेश ने इस गंभीर हाई प्रोफाइल मामले को स्व संज्ञान में लिया और माना कि उक्त घटना जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही और मॉनिटरिंग में समुचित कमी को दर्शाता है। और आयुक्त संदीप रजक ने कलेक्टर के एसपी के नाम पत्र लिखकर आदिवासी और दिव्यांग बच्चों के धर्मांतरण और बच्चों को अवैध तरीके से रखने पर आधारशिला संस्थान के विरुद्ध दर्ज प्रकरण में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धाराओं को शामिल करने और मामले की 7 दिनों में न्यायिक जांच करने के आदेश दिए। साथ ही उन्होंने आरोपियों को छात्रावास में निवासरत दिव्यांग बच्चों को सुरक्षा और देखभाल करने के निर्देश दिए बावजूद अभी भी बच्चों को किसी अन्य सुरक्षित जगह सिफ्ट नही किया गया, तय समय बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई.!

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न्यायायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्न : कानूनी अधिकार वेधशाला ने भी बीते दिनों एक ट्वीट किया जिसमे उन्होंने दमोह के मुखिया कलेक्टर सहित न्यायायिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हुए धर्मांतरण के मामले में आरोप लगाया कि दमोह कलेक्टर की पत्नी उनके (धर्मांतरण मामले में आरोपी) FCRA NGO में काम करती थी और न्यायाधीश उसके कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, इसलिए उसे जमानत मिल जाएगी.! हालाकि आरोपियों की अग्रिम जमानत फिलहाल निरस्त हो गई।

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आरोपियों को मिलेगी क्लीन चिट : कानूनी अधिकार वेधशाला (Legal Rights Observatory) द्वारा किए गए ट्वीट से अनेक प्रश्न खड़े होते दिख रहे है लग रहा है इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को मिले सबूतों के आधार जिन आरोपियों पर दर्ज कराई गई, उन्हें अब जल्द ही अग्रिम जमानत मिल सकती है क्योंकि प्रशासन अपना मजबूत पक्ष रखता नही दिख रहा है और संभावना तो यह भी है कि कहीं ऐसा भी हो सकता है कि जल्द ही आरोपी बेदाग होंगे.!

अब इस हाई प्रोफाइल मामले को लेकर जो प्रश्न उठ रहे है उसका जवाब जानने की कोशिश भी की जानी चाहिए..

1. अपने परिजनों के साथ हुए धर्मांतरण के मामले में आवेदक दंपत्ति क्या लाल परिवार के कहने पर मामले को तूल दे रही ताकि जांच की दिशा मोड़ दी जाए..?

2. दंपति जब धर्मांतरण का विरोध कर रही है तो उसने चर्च की सदस्यता के लिए आवेदन क्यों दिया..?

3. दंपति ने 9 साल बाद ही धर्मांतरण का विरोध क्यों किया..?

4. क्या न्यायालय आयुक्त नि:शक्तजन मध्यप्रदेश को भी जिला प्रशासन भ्रमित कर देगा.?

5. क्या प्रियांक कानूनगो को मिले साक्ष्य को जिला प्रशासन झुठला देगा और लाल परिवार के सदस्यों को क्लीन चिट मिल जायेगी.?

6. कलेक्टर व एसपी मढ़ाहार चेक करने गए थे, क्या चेक किया अभी तक पता नहीं.?

8. एएसपी ने बाल भवन चेक किया लेकिन जो चेक किया उसे इंटरनल क्यों बता रहे.?

9. न्यायालय नि:शक्त जन आयुक्त द्वारा न्यायिक जांच के निर्देश दिए थे, न्यायिक जांच किससे कराई जा रही क्यों नही बताया जा रहा.?

10. क्या हिंदू संगठन के लोगों पर कार्रवाई ईसाई मिशनरियों इशारे पर हो रही.?

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