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नारद की नज़र- स्वास्थ्य मंत्री के दावे की खुल गई पोल.. जिला अस्पताल दमोह का ऑक्सीजन प्लान फेल..!

दमोह – कुछ दिनों पहले स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी का एक बयान सामने आया था कि हम प्रदेश के 45 जिला अस्पतालों को ऑक्सीजन के लिए आत्मनिर्भर बना रहे हैं। ऐसा होने से हमें बाहर से ऑक्सीजन आयात नहीं करना पड़ेगी। लेकिन आक्सीजन के लिए आत्मनिर्भर बने दमोह जिला अस्पताल ने स्वास्थ मंत्री के दावे को पोल खोलकर रख दी है।

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ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण समारोह

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पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल और प्रदेश के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत दमोह जिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से बने एक ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण किया था। लेकिन इस प्लांट को जिला अस्पताल सुचारू रूप से चालू नहीं रख सका और ऑक्सीजन के लिए आत्मनिर्भर बना यह सरकारी अस्पताल आज भी बाजार की आक्सीजन पर निर्भर है जिसे हर रोज करीब 65 सिलेंडर जबलपुर की निजी एजेंसी से मंगवाने पड़ रहे हैं।

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जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आई गाड़ी

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सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया करीब 3 करोड़ रुपए का ऑक्सीजन प्लांट अस्पताल के जिम्मेदारों की वजह से शुरू होते ही फेल होता दिखाई दे रहा है। सभी को ऑक्सीजन प्लांट से भरपूर मात्रा ने ऑक्सीजन सप्लाई की उम्मीद थी, लेकिन लगने के साथ ही यह प्लांट अपनी क्षमताओं पर खरा नहीं उतर पाया.! इस प्लांट के चालू होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन बाजार के ऑक्सीजन सिलेंडर पर ही निर्भर है।

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प्रतिदिन मंगवाए जा रहे 65 ऑक्सीजन सिलेंडर

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गौरतलब है कि पिछले वर्षों से लगातार जिला अस्पताल की ढेरों अनियमितताएं सामने आ चुकी है, परंतु इनमें अब तक कोई सुधार होता नही दिख रहा है। पुरानी बिल्डिंग की कमजोरी को छुपाने के लिये टीन शेड लगा दिए गए लेकिन छत पर पहले से लगी हुई सोलर प्लेट्स को शिफ्ट नहीं किया गया, रसोईघर के टाइल्स टूटे हुए और वहां मौजूद चूहे भोजन को दूषित कर रहे हैं। यहां साफ सफाई पर भी ध्यान नहीं दिया जाता, जिस अस्पताल की सफाई मशीनों से होना चाहिए वहां हाथ से सफाई की जाती है।

Notice to Damoh District Hospital
सिविल सर्जन को जारी हुए नोटिस

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कमिश्नर-हेल्थ ने भी जब यहां का जायजा लिया तो वे भी इससे नाखुश थे परंतु प्रबन्धन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद अभी अभी क्षेत्रीय संचालक ने एक महीने के भीतर दो बार सिविल सर्जन को नोटिस थमाए जाने की खबर हैं, फिर भी यहां बदलाव नहीं आया। यहां तक की केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद प्रह्लाद सिंह पटेल भी जिला अस्पताल की इन व्यवस्थाओ से संतुष्ट हैं। अब तो ऑक्सीजन प्लांट पर भी उंगलियां उठने लगी है, फिर भी सब खामोश है जो किसी रहस्य से कम नहीं है। वहीं जिम्मेदारों का कहना है अभी प्लांट की टेस्टिंग चलेगी। अब इसका क्या अर्थ निकाला जाए कि जब तक टेस्टिंग चलेगी तब तक जबलपुर से प्रतिदिन ऑक्सीजन सिलेंडर आते रहेंगे और बिलिंग का खेल क्या यूं ही चलता रहेगा..!

                 

ऑक्सीजन लाइन की टेस्टिंग कर करेगें सप्लाई चालू
जिला अस्पताल के आरएमओ डॉक्टर दिवाकर पटेल ने बताया कि क्रिटिकल केयर यूनिट के पेसेंट ठीक हो या रेफर हो जाए उसके बाद टेस्टिंग करते हुए प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई को चालू किया जाएगा, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। तो वहीं ऑक्सीजन सिलेंडर की गाड़ी लाने वाले अंशुल ने बताया कि हम प्रतिदिन जबलपुर से 65 ऑक्सीजन के सिलेंडर लेकर आते है। आज भी 65 ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए हैं।

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