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चुनाव में एक दूसरे के धुर विरोधी होरी में हुरियाकर खूब नचे, दमोह की राजनीतिक होली में खूब लगा लौंग इलायची का बीड़ा

दमोह- दमोह की चुनावी राजनीति के एक दूसरे के धुर विरोधी कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त राहुल सिंह लोधी व दमोह विधायक अजय टंडन रंग बरसे भीगे चुनरवाली पर जमकर थिरके। अवसर था केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल (Prahlad Singh Patel) द्वारा होली मिलन समारोह का, जिसमें उपचुनाव में एक दूसरे से जंग लड़ रहे राहुल व अजय का एक दूसरे के साथ नाचना चर्चाओं में बना हुआ है।

दमोह से कांग्रेस विधायक अजय टंडन (MLA Ajay Tondan) जहां पहले भाजपा के राज्यमंत्री के होली मिलन समारोह में शरीक हुए थे, वहीं दूसरे दिन पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया के मिलन समारोह में शामिल होकर होली का रंग जमाया था। जहां भाजपा ने होली मिलन समारोह आयोजित कर लिए हैं, वहीं कांग्रेस के होली मिलन समारोह का कोई पता नहीं है। अब चर्चाओं में यह बात सामने आ रही है कि दमोह कांग्रेस विधायक अजय टंडन का भाजपा प्रेम आखिर क्यों इतना बढ़ता जा रहा है। चर्चाओं का बाजार गर्म है, टाइगर इज बैक। 

दमोह की राजनीति का पुरोधा जयंत मलैया (Jayant Malaiya) को माना जाता है। उनके जन्म दिवस कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) से लेकर सुमित्रा ताई (Sumitra Mahajan) तक ने जयंत मलैया के प्रति नरम और खेद पूर्ण रवैया अपनाया था। पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया के होली मिलन समारोह से भी दमोह की राजनीतिक हवाएं जयंत के पक्ष में ही बहती हुई नजर आ रही है। आगामी 10 दिनों में यह बात दमोह के जनमानस में समझ भी आ जाएगी। जब यह बात आमजनमानस को समझ में आ रही है तो दमोह विधायक अजय टंडन राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। इसलिए वह भाजपा से नजदीकी बढ़ाने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ रहे थे, यही वजह थी कि केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल व उनके भाई विधायक जालम सिंह का हाथ पकड़कर जमकर थिरक रहे थे। एक दूसरे के परस्पर विरोधी नेता इस तरह नाच रहे थे, मानो यह जता रहे हों कि हम साथ-साथ हैं। 

दमोह से कांग्रेस विधायक अजय टंडन का भाजपा के प्रति लगाव और प्रेम इतना है कि कांग्रेस कमेटी द्वारा विधानसभा में दो बार भाजपा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है। पहले प्रस्ताव में बागेश्वर की कथा के कारण शामिल नहीं हो पाए थे, दूसरा जीतू पटवारी के निलंबन के बाद अविश्वास संकल्प पत्र लाया गया था, जिसमें भी दमोह से कांग्रेस विधायक अजय टंडन के हस्ताक्षर नहीं थे। आपको बता दें कि जिस साल चुनाव होते हैं, उसका चुनावी रंग होली से ही चढ़ना शुरू हो जाता है, होली के बाद से राजनीति का रंग जिस पर जितना चढ़ता है वही चुनाव फतह कर लेता है। अब आगामी विधानसभा चुनाव 2023 का चुनावी रंग क्या होगा इसकी विसात हिन्दू नव वर्ष की शुरूआत से बिछने लगेगी, जिसमें मलैया की वापसी व टंडन की विदाई के हुरियारे पौदा बुलवाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

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