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नारद की नजर : भविष्य की कैसी उज्जवल होगी भाजपा, 6 सदस्य फिर भी हार गए हम

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निष्पक्ष समाचार: केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का यह बयान की परिष्क्रमण की राजनीति का पर्दाफाश हो गया है अब भाजपा का उज्जवल भविष्य है तो नारद की नजर भ्रमित हो रही है कि बड्डा के पास 6 जिला पंचायत सदस्य थे तीन प्रत्याशी के पास तो 9 सदस्यों के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी कांग्रेस की झोली में आसानी से क्यों डाल दी गई। 

केंद्रीय राज्यमंत्री की पत्रकार वार्ता के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि हार के कारण बने मुख्य किरदारों ने भाजपा जिलाध्यक्ष, पूर्व मंत्री, वर्तमान मंत्री के साथ पूर्व विधायक को लपेट लिया है। अब नारद के भ्रमण के दौरान पूरे दमोह में एक ही चर्चा सुनाई दे रही है कि बड्डा जिन्होंने अपना चुनाव लड़ा था तब भी उनके पास 6 सदस्य थे, अब वह मैदान में नहीं थे तब भी उनके पास 6 सदस्य थे। उन्होंने स्वयं का चुनाव कचहरी हनुमान मंदिर में रामबाई को उपाध्यक्ष बनाकर वैतरणी पार कर ली थी, फिर इस बार स्वयं जटाशंकर भगवान की शरण में हैं, वहीं पर इनका बंगला है। जब सुबह 10 बजे चंद्रभान सिंह जटाशंकर पहुंचे तो उनके बंगले के बजाए उनकी गाड़ी आगे क्यों बढ़ गई और वहां कांग्रेस प्रत्याशी रंजीता के पति गौरव पटेल की गाड़ी के पास पहुंचकर क्या डील हुई क्या इससे पंचायत राजनीति के पुरोधा बड्डा अनभिज्ञ क्यों बने रहे।

बड्डा यानि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल पंचायती राज के वे माहिर खिलाड़ी हैं। जिन्होंने अपने जेल में बंद पुत्र को न केवल जनपद पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया बल्कि हटा जनपद अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन भी कराया है। जनता के बीच भाजपा की हार के पीछे के कई कारण सामने आ रहे हैं। जिसमें बैकडोर से मलैया मील में ऋषि लोधी व दृगपाल की एंट्री हुई है। जबकि दृगपाल मुख्यमंत्री के पास भी चंद्रभान सिंह के साथ एंट्री मार चुके थे। 

बल्लू लिंबरदार नहीं तो भांजा सही : त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के मुख्य किरदार बड्डा बल्लू लिंबरदार को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का रूझान भी इसी तरफ था। लेकिन भाजपा आलाकमान के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी ने इस पर अपनी असहमति जता दी थी। बड्डा को कुर्मी जातिय धु्रवीकरण का नेता भी माना जाता है जिससे बड्डा ने एक रात में कांग्रेस प्रत्याशी गौरव पटेल की पत्नी जो बल्लू लिबंरदार के सगे भान्जे हैं उनकी जीत की कहानी लिख दी। अब स्वयं की लिखी पटकथा में पूर्व संभावित पराजय का ठीकरा पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया, कैबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव, पूर्व विधायक लखन पटेल के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी पर फोड़कर अपनी ओर घुमने वाली शक की सुईयों को मोथला कर दिया है। हां मैं हां मिलाने वाले पत्तलकारों ने भी इसे बढ़ाचढ़ाकर जिला पंचायत अध्यक्ष की बात से विरोधियों को परास्त कर भाजपा का भविष्य उज्जवल बनाने में महती भूमिका निभाई है।

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