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मै जातिगत राजनीति का पक्षधर नहीं – भार्गव

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दमोह – मध्यप्रदेश शासन में मंत्री रहली विधायक गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव कोरोना वारियर्स सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दमोह आए। दमोह आगमन पर अभिषेक का अनेक जगह स्वागत किया गया। श्री हनुमान धाम समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दमोह जिले के सफाई विभाग, स्वास्थ्य विभाग, समाज सेवी सहित अनेक लोगों का सम्मान हुआ।

इस दौरान अभिषेक ने लॉकडाउन के समय के घटनाक्रम और समाज सेवा को, लोगों से सांझा किया। साथ ही दमोह के लोगों की तारीफ कर कहा कि दमोह आकर मै फूलों से घायल हो गया और कहा दमोह आज कुछ अलग लग रहा है यहां प्रेम और सम्मान देखने मिला। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस के अनेक नेता मंच पर मौजूद रहे।

ज्ञातव्य हो कि मुख्यमंत्री के दमोह आगमन पर प्रबुद्धजनों के बीच चर्चा के दौरान दमोह जिले की किसी भी विधानसभा और लोकसभा से भाजपा द्वारा ब्राह्मण समाज से उम्मीदवार न बनाए जाने को बात भी चर्चा का विषय बनी रही थी उसके कुछ ही दिन बाद रहली विधानसभा के युवा और जुझारू नेता अभिषेक दीपू भार्गव को दमोह में आमंत्रित किये जाने के अनेक कायस लगाये जाने लगे हैं।

कोरोना वारियर्स सम्मान समारोह देखने में तो छोटा सा कार्यक्रम था किंतु जिस तरह से उनका स्वागत और काफिला जनता ने देखा उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में दमोह जिले के राजनीतिक समीकरण और नेतृत्व कुछ और ही होने वाला हैं। इस बात की पुष्टि तब और हो गई जब पत्रकार वार्ता के दौरान अभिषेक ने कहा कि भाजपा में एक खूबसूरत बात है कि कोई भी व्यक्ति कही से भी दावा प्रस्तुत कर सकता है लेकिन यह हमारा शीर्ष नेतृत्व ही तय करता है कि उस व्यक्ति या कार्यकर्त्ता का कहा उपयोग किया जाना है। जब समय आयेगा तब पार्टी जहाँ भी तय करेगी वहां से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूँ।

राजनीति में युवा नेतृत्व के बारे में उनका कहना है कि वृक्ष भी समय आने पर अपने पत्ते गिरा देता है यह प्रकृति का नियम है इसलिए धीरे धीरे जब वृद्धावस्था आती है तो लोगों के राजनीति से हट जाना चाहिए अब तो युवाओं का राजनीति में आने का समय है उन्होंने जातिगत राजनीति करने से इंकार किया और कहा में इसका पक्षधर नही हूँ ।

दलबदलू को पार्टी से टिकट दिए जाने की बात पर उनका कहना था की तात्कालिक परिस्थितियों को देखकर राजनीति में निर्णय लिए जाते हैं। दलबदल कोई नया विषय नहीं और राजनीति में लिया गया निर्णय सही है या गलत, यह तो समय तय करता है। दलबदल करने वालों का लघुकालीन फायदा और दीर्घकालीन नुकसान हो सकता है। इस दौरान उन्होंने कोविड वैक्सीनेशन पर जोर दिया और कोरोना काल में मिडिया द्वारा किये गए कार्यों के लिए भी धन्यवाद दिया।

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