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सरकारी आंकड़ों के हिसाब से जब जिले में कोरोना पूरी तरह कंट्रोल है तो निजी अस्पताल पर ताले लगाकर क्या साबित करना चाहता है प्रशासन !

निजी अस्पताल पर कार्रवाई करते पथरिया सीबीएमओ डॉ. ई मिंज

दमोह/पथरिया: एक तरफ कोरोना के संक्रमण के खतरे के बीच जिले के सरकारी अस्पतालों में डाक्टर और कर्मचारी 24 घंटे डटे हुए हैं।तहसील पथरिया में कोरोना के कहर को देखते हुए हर संभव प्रयास प्रशासन द्वारा किये जा रहे हैं। इतने विकराल समय मे निजी अस्पताल आम जन के लिए संजीवनी की तरह काम कर रहे हैं. सरकारी अस्पताल में न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही इलाज क्योंकि इस समय सभी सरकारी डाक्टर कोरोना से निपटने में लगे हुए हैं । ऐसी स्थिति में निजी अस्पताल सहायक किरदार की भूमिका लगातार निभा रहे थे लेकिन यह भी प्रशासन को नामंजूर रहा आज प्रशासन के निर्देश पर तहसीलदार आलोक जैन द्वारा नगर की सभी निजी क्लीनिकों को पूर्ण रूप से अनिश्चित समय तक बन्द करने के निर्देश दिए हैं एवं आदेश का उल्लंघन करने पर कार्यवाही करने की

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से एक सप्ताह में जिले में सिर्फ दो मौतें

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से एक सप्ताह में जिले में सिर्फ दो मौतें
सरकारी आंकड़ों के हिसाब से एक सप्ताह में जिले में सिर्फ दो मौतें

निजी अस्पतालों के बन्द होने से बढ़ेगी बीमारियां

पथरिया में कोरोना से आये दिन मौते हो रही है एवं लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। इस भीषण संकट के दौर में निजी अस्पतालों को बंद करने से मरीजों की समस्या और बढेगी एंसा नगर के लोगों का मानना है । दरअसल निजी अस्पताल से लोगों के सर्दी, खांसी,एवं अन्य बीमारियों के इलाज होने से लोगो के लिए एक उम्मीद बनी रहती थी कि सरकारी न सही निजी अस्पताल तो खुले हैं वहाँ दिखा लेंगे लेकिन उनके बन्द होने से नगर में वायरल ओर बढ़ सकता है।

आगामी आदेश तक निजी क्लीनिकों को बंद करने की समझाइश दी गई है,ना मानने पर कागजी कार्यवाही की जाएगी।एमबीबीएस, बीएएमएस,बी एच एम एस वाले अस्पताल खोल सकते हैं।

आलोक जैन, तहसीलदार पथरिया

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