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दमोह उपचुनाव 2021:- डबाकरा घोटाले का खुला डब्बा बंद कराने भाजपाई हो गए सतीश नायक..!

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नारद की नजर  :- बिल्लू और भोले के मोढ़ा के अपने गुणाभाग..!

दमोह :– दमोह उपचुनाव में सबसे बड़ी बात ये हो गई कि कांग्रेस के सितारा प्रचारक पूर्व मंत्री मुकेश नायक के छोटे भाई सतीश नायक जो कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष थे, मुख्यमंत्री के सामने भाजपा का दुपट्टा पहनने पहुंच गए। इनके साथ जगजीत उर्फ बिल्लू बाधवा और पुराने कांग्रेसी स्व. भोला शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र मनीष शर्मा भी फूलमय हो गए हैं।

अब भले ही भाजपा समझ रही हो कि इन तीन कांग्रेसी तिलंगों को शामिल कर वोटे बढ़ जाएगी, तो ये सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। मुकेश नायक कॉलोनी खेमे से खबर उड़ाई जा रही है कि सतीश नायक को भाजपा, नगर पालिका अध्यक्ष की टिकट देगी। लेकिन ये बात हवा-हवाई है, क्योंकि खबर यह भी है कि नगर पालिका परिषद के लिए मलैया मील से सिद्धार्थ को शिव मामा हां कह गए हैं। तो फिर क्या बात है..?,

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नारद ने अपनी पुरातन पत्रकारिता का पेंच घुमाया और नारायण, नारायण का जाप करते हुए जब पैनी नजर गढ़ाई तो एक कागज मिल गया। जिसका सार था कि ईओडब्ल्यू ने 1993 से 1996 के बीच दमोह में 12 लाख 10 हजार रुपए के गबन के मामले में करीब 27 साल बाद दमोह की विशेष अदालत में चालान पेश किया था। जिसमें मुख्य आरोपी तत्कालीन दमोह जनपद अध्यक्ष सतीश नायक बनाए गए थे। इस गबन के मामले में 170 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

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मामला यह है कि 1993 से 1996 तक (डेवल्पमेंट ऑफ वूमेन एंड चिल्ड्रन इन रुरल एरियाज) डबाकरा योजना चलाई गई थी। जिसमें गरीबी रेखा से जीवन यापन करने वाली महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें स्व सहायता समूह गठित कर 10 से 15 हजार रुपए की राशि दी जानी थी। लेकिन यह राशि हड़प ली गई और महिलाओं को रोजगार नहीं मिला। इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। सतीश नायक द्वारा कांग्रेस छोडऩे और भाजपा ज्वाइन करने का यह भी एक कारण माना जा रहा है।

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अब भले मुख्यमंत्री शिवराज, माफिया राज की बड़ी-बड़ी डींगे हांकते हों, लेकिन दमोह की जनता ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार और पुलिस की पोल खुलते हुए देखी है। अब छोटे नायक को भी लग रहा होगा कि भाजपा में जाने के बाद डबाकरा घोटाले के इस खुले डिब्बे को बंद कराकर जो गढ़़े मुर्दे उखड़ आए हैं उन्हें फिर दफन कराया जा सकता है।

एक कारण यह भी माना जा रहा है कि मुकेश नायक राजनीति के मजे हुये खिलाड़ी हैं और अपनी दूरगामी सोच के कारण छोटे नायक को प्रयोग के तौर पर पहले भाजपा में भेज दिया हो और आनेवाले समय में समीकरण ठीक रहे तो वह भी एंट्री कर सकते हैं।

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अब बात करें मद्य, कॉलोनी और प्लॉटिंग के धंधे में हाथ आजमाने वाले बिल्लू बाधवा कि तो भैया भाजपा शासन काल में उन्हें व उनके भाई को दबाने कई हथकंडे अपनाए गए, जो सभी को पता हैं अब भाजपा की सरकार है तो ऊगते सूरज को सलाम करने के लिए कांग्रेस के डूबते सूरज की ओर पीठ करके वह भी खड़े हो गए हैं।

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पुराने कांग्रेस स्व. भोले शर्मा के पुत्र मनीष शर्मा भले ही अपने पिता के जीते जी कांग्रेसी माने जाते रहे हों, लेकिन उनका घालमेल भाजपा से ज्यादा रहा है, अब शर्मा कंपनी की जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई है और नफा-नुकसान का हिसाब किताब जोड़कर भाजपाई हो गए हैं।

दमोह उपचुनाव में कहां क्या गुणा भाग हो रहा है जल्दी ही बताएंगे पढ़ते रहे निष्पक्ष समाचार: नारायण..नारायण..नारायण..

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