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जयपुर में विधानसभा स्पीकर्स का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, अदालत के दखल का उठा मुद्दा की

जयपुर में विधानसभा स्पीकर्स के राष्ट्रीय सम्मेलन में सरकार के कामकाज में कोर्ट के गैर-जरूरी दखल का मुद्दा उठा। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और सीएम अशोक गहलोत ने अदालती हस्तक्षेप के मुद्दे को उठाया। उपराष्ट्रपति ने संसद के बनाए कानून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द करने पर खूब नाराजगी जाहिर की।

धनखड़ ने कहा कि ससंद ने जो कानून बनाया है, क्या उस पर कोर्ट की मुहर लगेगी, तभी कानून होगा?
धनखड़ ने कहा कि 1973 में एक बहुत गलत परंपरा चालू हुई। केशवानंद भारती केस में सुप्रीम कोर्ट ने बेसिक स्ट्रक्चर का आइडिया दिया कि ससंद संविधान संशोधन कर सकती है, लेकिन इसके बेसिक स्ट्रक्चर को नहीं। कोर्ट को सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि इससे मैं सहमत नहीं, हाउस बदलाव कर सकता है। यह सदन बताए कि क्या इसे किया जा सकता है? क्या ससंद को यह अनुमति दी जा सकती है कि उसके फैसले को कोई और संस्था रिव्यू करे?
धनखड़ ने कहा- जब मैंने राज्यसभा के सभाापति का चार्ज लिया तब कहा था कि न तो कार्यपालिका कानून को देख सकती है, न कोर्ट हस्तक्षेप कर सकती है। ससंद के बनाए कानून को किसी आधार पर कोई संस्था अमान्य करती है तो प्रजातंत्र के लिए ठीक​ नहीं होगा। कहना मुश्किल होगा कि हम लोकतांत्रिक देश हैं।
धनखड़ ने कहा कि 2015 में ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी कानून पारित किया, सर्वसममति से पारित हुआ। 16 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया। दुनिया में ऐसा कहीं नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के सामने ससंद की संप्रभुता से समझौता कैसे हो सकता है?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा- न्यायपालिका भी मर्यादा का पालन करे। न्यायपालिका से उम्मीद की जाती है कि जो उनको संवैधानिक अधिकार दिया है, उसका उपयोग करे, लेकिन अपनी शक्तियों का संतुलन भी बनाए। हमारे सदनों के अध्यक्ष यह चाहते हैं।
राजस्थान विधानसभा में आज से दो दिन तक अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन (AIPOC) हो रहा है। इसमें देश भर के विधानसभा और विधान परिषद स्पीकर्स भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी शामिल हुए। इस सम्मेलन में 11 और 12 जनवरी को देशभर से आए विधानसभा और विधान परिषदों के अध्यक्ष जी-20 से लेकर विधायिका और न्याय पालिका में टकराव रोकने के मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

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