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चुनौतियों भरा होगा IPS राकेश कुमार सिंह का दमोह सफर

दमोह :– राज्य सरकार ने सेनानी, 13वीं वाहिनी, विसबल, ग्वालियर से दमोह भेजे नए पुलिस कप्तान IPS राकेश कुमार सिंह ने नए वर्ष ने पहले सप्ताह में ही जिले के लॉ–एंड–ऑर्डर की बागडोर अपने हाथों में संभाल तो ली है लेकिन उनके सामने अनेक चुनौतियां और ज्वलंत मुद्दे है जिनसे पुलिस कप्तान को दो–चार होना पड़ेगा। नवागत पुलिस कप्तान के सामने अपराध पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के अलावा शातिर अपराधियों की गिरफ्तारी, कोर्ट के आदेशों का समय से पालन, अवैध रेत-पत्थर व शराब की बिक्री, ओवरलोडिंग पर रोक लगाना, पूरे जिले में अमर बेल की तरह फैला सट्टा और जुआ का कारोबार पर अंकुश उनके लिए चुनौती साबित होने वाला है।

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यही नहीं पथरिया थाना के पास तो स्थाई अवैध जुआफड़ चल रहे हैं। लेकिन मजाल है कि कोई इसे बंद करा सके। पथरिया थाना क्षेत्र के अलावा जिले में अनेक जगह जुआ फड़ और सट्टा की खबरें लगातार मिलती है। इन चुनौतियों के अलावा जिले में बीते कुछ महीनों में अपराध का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ा है, चाकूबाजी, चोरी, हत्या, बलात्कार, मानव तस्करी, गौ–तस्करी, अपहरण, डिजिटल क्राइम जैसे गंभीर अपराध को रोकना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है। 

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अगर शहर की बात करें तो पुलिस गश्त के बाबजूद चोर अपने काम को अंजाम दे रहे है, बीते दिनों दमोह शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के कसाई मंडी इलाके में संचालित एक अस्थायी पुलिस चौकी में तैनात एसएएफ आरक्षक की हत्या हो गई, तो बीती रात पुलिस और वनकर्मी के घर में ही चोर हाथ साफ करने से नही चूक रहे। इस गंभीर घटनाओं के बावजूद आम लोगों में पुलिस का भरोसा कायम रखना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना नए SP की जिम्मेदारी होनी चाहिए। 

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तो वही जिले में धर्मांतरण से जुड़ा मुद्दा भी ताजा है, जो कुछ दिनों से देश–विदेश में सुर्खियां बना हुआ है और पूर्व पुलिस अधीक्षक डीआर तेनीवार के तबादले का कारण SAF आरक्षक की हत्या, मंदिर में तोड़फोड़ और धर्मपरिवर्तन के मामलों को बताया जा रहा है। क्योंकि इन घटनाक्रम पर दमोह पुलिस की कार्यशैली पर अनेक दफा प्रश्नचिन्ह लगा है। जिले की बागडोर संभालते ही कप्तान ने जिले भर की पुलिस को वाहन चेकिंग करने में लगा दिया, बताया जा रहा इस चेकिंग के अपराधों पर अंकुश लगेगा, अब यह चेकिंग अभियान किस लिए होता है यह तो बच्चा बच्चा भी समझता है। 

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बिना परमिट के फर्राटा मारते वाहन और दर्जनों अवैध वाहन स्टैंड और अतिक्रमण के प्रति थानेदारों की बेपरवाही के कारण शहर की सड़कों पर पैदल चल पाना भी दूभर हो गया है। इन हालात को देखते हुए जिले के लोगों को उम्मीद है कि नए कप्तान के आने के बाद पुलिस की कार्यशैली में सुधार आएगा और रोजमर्रा से जुड़ी उनकी समस्याओं का अंत होगा।

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इन मुद्दों के अलावा पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती अपराध अनुसंधान को लेकर है। अपराध के नए तौर-तरीके पनप रहे हैं, लेकिन इस लिहाज से पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। सीमित संसाधनों के बल पर इनसे निबटना टेढ़ी खीर है। एक साथ अनेक मोर्चो पर सफलता के लिए पुलिस कप्तान को रणनीति बनानी होगी। तेजतर्रार अफसरों का चयन कर इस मिशन में कामयाबी पाई जा सकती है। पुलिस बल में मानव संसाधन की कमी का भी खासा दबाव है। कम संख्या में ज्यादा से ज्यादा काम लेने की वजह से पुलिसकर्मी तनाव में रहते हैं। इसका असर उनके व्यक्तिगत जीवन पर पड़ता है। 

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पुलिस के समक्ष एक बड़ा संकट समाज के अविश्वास का भी है। सामान्य व्यक्ति थाने में जाने से डरता है। प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए उसे पदाधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ता है। कई आपराधिक मामलों की जानकारी इस वजह से लोग पुलिस तक नहीं पहुंचाते कि बेवजह की परेशानी झेलनी होगी। इस छवि से भी पुलिस को बाहर निकलना होगा। 

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