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उत्तराखंड के ‘धंसते शहर’ में घर गिरने के डर से ठंडी रात में बाहर रहने को मजबूर लोग

बता दे की सरकार के द्वारा अब तक 38 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है.बाकी अन्य लोग अभी भी टूटे हुए घरों में ही रह रहे हैं, और या तो फिर रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ चले गए हैं.

उत्‍तराखंड के पहाड़ी शहर जोशीमठ में एक होटल की झुकी हुई बिल्डिंग इस बात का भलीभांति आभास कराती है कि बेरोकटोक विकास कार्यों के कारण किस कदर इस बिल्डिंग में दरारें पड़ गई हैं. प्रमुख हिंदू और सिख तीर्थयात्रियों के लिए प्रवेश बिंदु इस शहर के 500 से अधिक घर ढहने की सी स्थिति में आ गए हैं. जोशीमठ, चीन के साथ भारत की सीमा के पास प्रमुख सैन्य ठिकानों में से एक भी है. NDTV की एक टीम ने देखा कि सड़कों के साथ चल रही दरारें लगातार चौड़ी होती जा रही है. नगरपालिका प्रमुख के अनुसार, 3000 से अधिक प्रभावित हुए हैं जो कि 6 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे इस शहर की आबादी के 10 फीसदी से अधिक हैं.
करीब 40 परिवार पहले ही बाहर जा चुके हैं क्योंकि भूकंप के लिए अतिसंवेदनशील क्षेत्र में मिट्टी का धंसाव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है. पुनर्वास की मांग को लेकर स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को यहां का दौरा करने वाले हैं. विशेषज्ञों की तैनाती की गई है. राज्‍य की बीजेपी सरकार का कहना है कि इनकी रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरत के मुताबिक जो भी करने की जरूरत होगी, वह करेगी. वैसे, स्थानीय लोगों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और निरंतर बुनियादी ढांचे के विकास इस स्थिति के लिए जिम्‍मेदार हैं. एक स्थानीय होटल व्यवसायी ने कहा, “हाइड्रोपावर प्‍लांट्स के लिए खोदी जा रही सुरंगों के कारण यह हुआ है. वे सड़कों को चौड़ा करने, बायपास बनाने, यहां तक ​​कि हमारे शहर के बहुत करीब तक चट्टानों के माध्यम से विस्फोट करना जारी रखे हैं. उन्होंने कहा, “हम लगातार डर में जी रहे हैं. लोग आग जला रहे हैं, ठंडी रातों में बाहर रह रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उनके घर या होटल कभी भी गिर सकते हैं.”
सरकार के समाधान को लेकर काम करने पर उन्होंने कहा, “कई साल पहले कदम उठाए जाने चाहिए थे क्योंकि यह कोई नई घटना नहीं है. एक के बाद एक सरकारों ने इस बात को नजरअंदाज किया है कि बड़ी परियोजनाएं विनाश की ओर लेकर जाती हैं. ” इस बीच, प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों सहित विशेषज्ञों की एक टीम ने घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया.
चमोली जिला प्रशासन के अनुसार, आधिकारिक तौर पर 561 प्रतिष्ठानों में दरार की सूचना मिली है. बयान में कहा गया है कि होटल व्यू और बगल की इमारत मलारी इन के संचालन को प्रतिबंधित कर दिया गया है. सरकार द्वारा अब तक 38 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है.अन्य लोग अभी भी टूटे हुए घरों में रह रहे हैं या रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ चले गए हैं.
जिला प्रशासन ने पहले ही हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (HCC) और नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) को प्रभावित परिवारों को आश्रय देने के लिए तैयार रहने को कहा है. 6,000 फीट से अधिक ऊंचे इस शहर को हिमालय में कई चढ़ाई अभियानों के लिए प्रवेश द्वार माना जाता है, इनमें बद्रीनाथ और हेमकुंट साहिब के तीर्थस्थलों और फूलों की घाटी तक की यात्रा शामिल है.

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